बदायूॅं जनमत। सर्दी आते ही हर साल कोयला माफिया हवा में जहरीला धुआं घोलना शुरू कर देते हैं। आरोप है कि यह काम प्रशासनिक अधिकारियों की सांठगांठ से होता है। हालांकि पिछले वर्ष एसडीएम ने कोयला बनाने वाली सभी भट्टियों को तोड़ने का आदेश दिया था। लेकिन इस साल अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है और जहरीला धुआं लोगों का स्वास्थ्य बिगाड़ रहा है।
बता दें कि उसहैत में आबादी के आसपास आधा दर्जन से अधिक पूर्णतया प्रतिबंधित भट्टियां लगी हुई हैं। जिनमें खराब किस्म की लकड़ी को जलाकर कोयला बनाया जाता है। इन भट्टियों से निकलने वाला जहरीला धुआं आबादी में जाता है। इससे बच्चों और बूढ़े लोगों का स्वास्थ्य खराब होता है। साथ ही सांस और टीबी के मरीजों के लिए यह धुआं ज़हर का काम करता है। आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों की सांठगांठ से इस धंधे को अंजाम दिया जा रहा है। वहीं चंद रुपयों के लालच कोयला माफिया इस जहरीले काम को बढ़ावा दे रहे हैं।
इस संबंध में दातागंज के नायब तहसीलदार छविराम से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी वन विभाग की है। वन विभाग में संपर्क किया गया तो बताया गया कि लकड़ी जलाकर कोयला बनाने वाली भट्टियां पूर्णतया प्रतिबंधित हैं। यह अवैध तरीके से चलाई जा रहीं हैं लेकिन कार्रवाई प्रदूषण विभाग द्वारा की जाएगी।
एसडीएम ने की थी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई…
कोयला बनाने वाली इन भट्टियों के खिलाफ पिछले वर्ष एसडीएम दातागंज धर्मेंद्र सिंह ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी। हल्का लेखपाल की निगरानी में एक दर्जन से अधिक भट्टियों को तोड़ा गया था। लेकिन इस वर्ष फिर से कोयला माफिया सक्रिय हो गए और आबादी में फिर से लकड़ी जलाकर कोयला बनाने लगा।


