मारहरा जनमत। उर्दू नातिया शायरी के मुमताज़ कलमकार, एलाइट जूनियर हाई स्कूल सराए तरीन सम्भल के बानी और सिरसी सादात पीजी कॉलेज सिरसी सम्भल के सद्रे शोबए उर्दू प्रोफ़ेसर शफ़ीक़ुर्रहमान बरकाती की ताज़ा नातिया तस्नीफ “बरकाते रहमत” का बाज़ाब्ता इजरा (विमोचन) उर्स-ए-नूरी के पुरनूर मौके पर शबे ख़िरक़ा-पोशी में अमल में आया।
यह नातिया मजमूआ 786 अशआर की एक नाते पाक है, जिसमें प्रोफ़ेसर आबिद हुसैन हैदरी, अल्लामा कलीम अशरफ़ सम्भली, डॉक्टर मुनव्वर ताबिश, अल-हाज यामीन बरकाती, मुफ़्ती आलम रज़ा ख़ान नूरी, कामिल जनेटवी, डॉक्टर तारिक़ क़मर सम्भली, शाह आलम रौनक फ़रमान हुसैन अब्बासी, डॉक्टर मुहम्मद नईम मेरठी, अल-हाज तनवीर अशरफ़ी और अल्लामा सैयद अमान मियां क़ादरी बरकाती जैसे साहिबाने इल्म-ओ-अदब के मज़ामीन शामिल हैं।
पेश-ए-नज़र मजमूआ रसूल-ए-अकरम ﷺ से अक़ीदत-ओ-मुहब्बत का वालेहाना इजहार है जिसमें निहायत फ़न्नी हुस्न और अदबी वकार के साथ अशआर को पिरोया गया है। किताब का इजरा (विमोचन) ताजुल मशाइख़ प्रोफ़ेसर सैयद मुहम्मद अमीन मियाँ क़ादरी, बरकाती, पूर्व उर्दू विभाग अध्यक्ष अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी अलीगढ़, एवं सज्जादा नशीन ख़ानकाह-ए-बरकातिया मारहरा मुतह्हरा ने अपने दस्त-ए-मुबारक से फ़रमाया।
इस बाबरकत मौक़े पर सैयद मुहम्मद अशरफ़ क़ादरी बरकाती साबिक़ रुक्न सेटलमेंट कमीशन ऑफ़ इंडिया, सैयद नजीब हैदर नूरी साहिब ए सज्जादा ख़ानक़ाह बरकातिया नूरिया, सैयद मुहम्मद अमान मियाँ क़ादरी बरकाती, डायरेक्टर अल बरकात इस्लामिक रिसर्च इंस्टीट्यूट अलीगढ़, विश्व विख्यात अलीमें दीन सैयद अमीनुल क़ादरी मालेगांव, डॉक्टर अहमद मुज्तबा सिद्दीक़ी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अलीगढ़, शेख़ अतीफ मियां सज्जादानशीन खानकाह ए कादरिया बदायूं शरीफ, मुफ़्ती सलमान अज़हरी, अल्लामा तौसीफ़ रज़ा मिस्बाही सम्भली, सैयद हसन हैदर नूरी, डॉक्टर सैयद उस्मान मियाँ क़ादरी बरकाती, सैयद मोहसिन मियाँ नूरी, नज्मी बरकाती, ज़िया-उर-रहमान बरकाती समेत हज़ारों की तादाद में ज़ायरीन-ए-उर्स-ए-नूरी, उलमा-ए-किराम, सादात-ए-ज़वी-उल-एहतराम और अहले अक़ीदत मौजूद रहे।
उलमा और मशाइख़ ने प्रोफ़ेसर शफ़ीक़ुर्रहमान बरकाती की इस काविश को नातिया अदब (साहित्य) में एक अहम इज़ाफ़ा क़रार देते हुए कहा कि “बरकाते रहमत” नई नस्ल के लिए अक़ीदत, मुहब्बत-ए-रसूल ﷺ और अदबी ज़ौक़ की बेहतरीन रहनुमाई है।
संभल आगमन पर प्रोफेसर शफीक उर रहमान बरकाती को उनके इस अनोखे और निराले साहित्यक योगदान पर मुबारकबाद देने वाले साहित्यकारों, शायरों, कवियों एवं मित्रों का तांता लगा रहा। इनमें सुल्तान मोहम्मद खान कलीम, सैयद हुसैन अफसर, प्रोफेसर आबिद हुसैन हैदरी, मोहम्मद उमर खान, नाजिम उर रहमान, हकीम बुरहान संभली, इम्तियाज खान बरकाती, वामिक कमर बरकाती, जुनेद रफीक, हाफिज मेहंदी हसन, रेहान खान, शाने आलम, इंजीनियर रामसरन यादव, श्रषि पाल सिंह यादव, फिरोज खान हिन्दुस्तानी सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।

