बदायूॅं जनमत। मीजिल्स रूबेला बीमारी को लेकर जिले में एमआर अभियान का आयोजन 16 फरवरी से 27 फरवरी तक 4 से 6 नाॅन आरआई दिवसों (बुधवार व शनिवार एवं रविवार को छोड़कर) में किया जाना है। अभियान के अन्तर्गत जनपद के सभी सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों (स्कूल, मदरसे इत्यादि) में अध्ययनरत कक्षा 1 से 5 तक के सभी बच्चों को एमआर वैक्सीन की डोज दी जायेगी। समस्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं खण्ड शिक्षा अधिकारी, सीडीपीओ अन्य सम्बन्धित को स्कूल आधारित एमआर अभियान को सफल बनाने के लिए पूर्ण सहयोग प्रदान करें।
क्या है मिजिल्स रूबेला बीमारी…
मीजिल्स रूबेला इस बीमारी में पहले बच्चे को बुखार आता है। बुखार के चैथे या पांचवे दिन शरीर पर लाल रंग के चकत्ते दिखाई देने लगते हैं और यह लगभग चार से पांच दिन के बाद विलुप्त हो जाते हैं। इन लक्षणों के साथ साथ नाक का बहना, खांसी तथा आंख का लाल होना आदि के भी लक्षण हो सकते हैं।
नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत इस बीमारी के बचाव के लिए राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण सारणी के अनुसार बच्चे को 09 माह की आयु पूर्ण होने तक एव 16 से 23 माह की आयु के बीच मीजिल्स रूबेला की एक-एक खुराक दी जाती है। अगर पांच साल तक के सभी बच्चों को मीजिल्स रूबेला की दोनों खुराक मिल जायें तो ऐसी स्थिति में इस बीमारी का उन्मूलन किया जा सकता है। खसरा रूबेला बीमारी के ठीक होने के बाद भी दाने निकलने से 28 दिवस तक बच्चे को निमोनिया एवं डायरिया जैसे जटिलतायें हो सकती हैं, जिसके कारण बच्चे की मृत्यु भी हो जाती है। विगत वर्ष एवं वर्तमान समय में यह देखा गया है कि आधे से ज्यादा केस जोकि खसरा एवं रूबेला के लिए पाॅजिटिव पाये जा रहे हैं, 5 से 10 वर्ष की आयु के बीच हैं, इन बच्चों में बचाव के लिए यह आवश्यक है कि खसरा रूबेला की एक अतिरिक्त खुराक इनको दी जाये, जिससे कि इस आयु वर्ग में भी खसरा व रूबेला होने से रोका जा सके।
वहीं स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि यदि आपके क्षेत्र या स्कूल में कोई भी बच्चा बुखार के साथ लाल दाने यदि उसकी त्वचा पर पाये जाते हैं तो ऐसे केस की सूचना जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, जिला सर्विलांस अधिकारी व जनपद के समस्त प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को दूरभाष के माध्यम से दी जा सकती है। जिससे कि इन बच्चों को बचाने एवं इन बच्चों से समुदाय में अन्य बच्चों में रोकने के लिए विभाग द्वारा कदम उठाये जा सके।

