बरेली जनमत। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा मुस्तफा मस्जिद को कथित अवैध निर्माण के संबंध में नोटिस जारी किए जाने के मामले पर जमात रज़ा-ए-मुस्तफ़ा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जनाब सलमान हसन खान (सलमान मियां) ने कड़ी आपत्ति और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मुस्तफा मस्जिद कोई नया निर्माण नहीं है, बल्कि यह मस्जिद मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अस्तित्व में आने से पहले से कायम है। जिस समय यह मस्जिद बनी थी उस समय प्राधिकरणों और वर्तमान नियम नहीं बने थे। जिनके आधार पर किसी भी धार्मिक स्थल को अवैध घोषित कर दिया जाता है। अवैध घोषित करने से पहले उसके इतिहास और धार्मिक आस्था का ख्याल रखा जाये।
सलमान मियां ने बताया कि इस मामले को लेकर मुरादाबाद के स्थानीय लोग मरकज़ में आकर संपर्क किया और अपनी चिंता से उलमा-ए-किराम को अवगत कराया है। जमात रज़ा-ए-मुस्तफ़ा के हेड ऑफिस में उलेमा किराम की एक अहम मीटिंग हुई, इसको लेकर उलमा-ए-किराम ने भी अपनी नाराज़गी का इज़हार किया है और इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि किसी पुराने धार्मिक स्थल के संबंध में कार्रवाई करने से पहले उसके ऐतिहासिक एवं आस्था के पहलुओं को पूरी तरह देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में सहारनपुर में एक मस्जिद को गिराए जाने की घटना भी सामने आई, जिसको लेकर संबंधित पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है। ऐसे घटनाक्रमों को जल्द ही रोका जाना चाहिए जिससे प्रदेश का माहोल न ख़राब हो।
सलमान मियां ने सवाल उठाया कि क्या धार्मिक स्थलों की वैधता तय करने के लिए अलग-अलग पैमाने हैं? क्या केवल एक ही समुदाय के धार्मिक स्थलों को बार-बार नोटिस और कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा? अगर कानून सभी के लिए समान है तो फिर सभी धार्मिक स्थलों पर समान नियम और समान प्रक्रिया क्यों नहीं दिखाई देती दोहरे मापदंड क्यों अपनाये जा रहे हैं ?
हाफिज इकराम कहा कि हम वरिष्ठ और गंभीर अधिकारियों से कहना चाहते हैं कि हम कानून और संविधान में विश्वास रखते हैं। लेकिन कानून की आड़ में किसी के साथ अन्याय भी नहीं होना चाहिए। मुस्तफा मस्जिद के पुराने दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और उसके अस्तित्व की ऐतिहासिक स्थिति को देखा जाये जाए और संबंधित पक्ष को अपना पूरा पक्ष रखने का अवसर दिया जाए, तब तक किसी प्रकार की कार्रवाई न की जाए।
मीटिंग में सय्यद अज़ीमुद्दीन अज़हरी, मौलाना शम्स, मौलाना ज़ैद रज़ा, मौलाना आज़म रज़ा, हाफ़िज़ इकराम, डॉ मेहँदी, इक़रार अहमद आदि लोग मौजूद रहे।

