उर्से रज़वी 2025; आला हजरत के कुल में उमड़े लाखों जायरीन, शहर की सड़कों पर दिखा जनसैलाब

धार्मिक

बरेली जनमत। उर्स-ए-रजवी के तीसरे दिन आज बुधवार को आला हजरत के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। आला हजरत के कुल में लाखों जायरीन के शिरकत करने का अनुमान है। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि बुधवार को सुबह कुरानख्वानी के बाद आठ बजे से इस्लामिया मैदान पर महफिल सजी। दोपहर 2:38 बजे आला हजरत के कुल शरीफ की रस्म शुरू हुई। इसमें शामिल होने के लिए लाखों जायरीन पहुंचे हैं। कुल की रस्म के साथ तीन दिवसीय उर्स मुकम्मल हुआ।
रात में 10 बजकर 35 मिनट पर आला हज़रत के बड़े साहिबजादे हुज्जातुल इस्लाम मुफ्ती हामिद रज़ा खान (हामिद मियां) के कुल शरीफ की फातिहा मुफ्ती जईम रज़ा और मुफ्ती जमील ने पढ़ी। मुफ़्ती सलीम नूरी बरेलवी ने अपने खिताब में कहा कि शिक्षा के लिए आज प्रचार प्रसार किया जा रहा है, लेकिन हुज्जातुल इस्लाम ने 1938 में मुरादाबाद में हुई एक बड़ी कॉन्फ्रेंस में मुसलमानों से अपने बच्चों को तालीम दिलाने पर ज़ोर देते हुए अपने आप को आर्थिक रूप से मजबूत करने का आव्हान किया। उन्होंने दुनिया भर में सुन्नियत की पहचान कराने में अहम भूमिका अदा की, आला हज़रत की वजह से बरेली सुन्नियत का केंद्र बन गया। हम लोग मुल्क की हिफाज़त, आपसी सौहार्द और हिंदू-मुसलमानों के बीच बड़ी दूरियों को खत्म करने के लिए प्रयास करें।
आला हजरत के उर्स के दौरान दुनिया भर से लोग बरेली आते हैं, और इस अवसर पर विभिन्न प्रकार की शायरी और कलात्मक प्रदर्शन होते हैं। यह एक ऐसा मौका है जहां विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं के लोग एक साथ आते हैं, अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और कलात्मक अभिव्यक्तियों का आदान-प्रदान करते हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से लोग इसमें शामिल होते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *