बदायूं में राष्ट्रीय लोक अदालत में 49059 वादों का हुआ निस्तारण; आपसी विवाद, बैंक, राजस्व, दुर्घटना के मामले निपटे

उत्तर प्रदेश

बदायूॅं जनमत‌। जनपद न्यायाधीश व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें जनपद न्यायाधीश विवेक संगल द्वारा जनपद न्यायालय परिसर में मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजली अर्पण कर एवं दीप प्रज्जवलित करके राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने विचार व्यक्त किए, कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत को राष्ट्रीय लोक कल्याणकारी दिवस के रूप में आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत एक पर्व है जहां पर पक्षकार अपने-अपने हितों के अनुरूप आपसी समझौते के आधार पर सस्ता एवं सुलभ न्याय प्राप्त कर सकते है। इसके अतिरिक्त उनके द्वारा बैंक अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को धन्यवाद करते हुए कहा कि आम-जन अपने बैंक विवादों को आपसी समझौते के आधार पर निस्तारित करा सकते हैं।
अपर जिला सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि आम-जन न्यायालय में लम्बित विवादों जैसे आपराधिक शमनीय वाद, एनआई एक्ट-अन्तर्गत धारा 138 मोटर दुर्घटना सम्बन्धित वाद, वैवाहिक पारिवारिक विवाद श्रम सम्बन्धी वाद, भूमि अधिग्रहण सम्बन्धी वाद, किरायेदारी, ट्रेफिक चालान, राजस्व बाद, विद्युत बिल आदि विवादों का निस्तारण इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से करवा सकते है।
राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय एवं अपर प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय द्वारा अपने न्यायालयों में आपसी समझौते के आधार पर कुल 210 पारिवारिक विवादों का निस्तारण किया गया। वहीं मचला अग्रवाल पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा कुल 16 मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाओं का निस्तारण कर अंकन 94 लाख 35000 रुपये की धनराशि पीड़ितों को बतौर क्षतिपूर्ति दिलायी गई। उपभोक्ता फोरम द्वारा 09 वादों में से 07 वादों का निस्तारण कर अंकन 20 लाख 40242 रुपये की धनराशि पीड़ितों को बतौर क्षतिपूर्ति दिलायी गयी।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा कुल 2039 मामलों का निस्तारण
उक्त राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन से सम्बन्धित वादों में विभिन्न बैंकों के 1233 मामले, भारत संचार निगम लिमिटेड के 14, राजस्व सम्बन्धित 349 मामले, 767 स्थानीय निकाय के मामले एवं अन्य प्रकार के 44011 मामले थे। इस प्रकार कुल 40319 प्री-लिटिगेशन मामलों का एवं न्यायालयों में लम्बित फौजदारी एवं सिविल वादों में 8740 वादों का निस्तारण हुआ। जिसके चलते राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 49059 वादों का निस्तारण हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *