बदायूॅं जनमत। चार दिन पहले आई आंधी में घायल हुए राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत हो गई। ग्रामीणों ने एक युवक पर मोर को मार डालने का आरोप लगाया है। वहीं वन विभाग के कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आक्रोश व्यक्त किया है। उनका कहना है कि वनकर्मियों ने फोन नहीं उठाया, जिससे मोर की जान नहीं बच सकी।
थाना इस्लामनगर क्षेत्र के गांव ब्योरा कासिमाबाद निवासी फिरासत घायल मोर को उपचार के लिए अपने घर ले आया था। ग्रामीणों का आरोप है कि फिरासत ने मोर का इलाज करने के बजाय उसे तड़पाकर मार डाला। मोर की मौत के बाद उसके पंख धारदार हथियार से काट लिए गए। शव को दफनाने के बजाय तालाब में फेंक दिया गया। बाद में ग्रामीणों ने एकत्र होकर मोर के शव को दफनाया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उन्होंने वन विभाग को सूचना देने के लिए फोन किया था। मगर वनकर्मियों द्वारा फोन नहीं उठाया गया। थाना अध्यक्ष उदयवीर सिंह ने घटना की सूचना वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दी।
वन विभाग के अधिकारियों ने गांव में वनकर्मियों को भेजकर मृत मोर को तालाब से निकलवाया। उसे पोस्टमॉर्टम के लिए बरेली भेजा गया है। उनका आरोप है कि समय पर इलाज मिलने से मोर की जान बच सकती थी। इस मामले में आगे की जांच जारी है।

