बदायूॅं जनमत। उसहैत क्षेत्र के गांव रसूलपुर नगला स्थित कादरी मस्जिद में 13 रबीउल अव्वल पर आमद-ए-रसूल ﷺ व इस्लाहे मुआशरा कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आग़ाज़ कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुआ। इसके बाद, स्थानीय और बाहर से आए नातख्वांओं ने पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा की शान में नातें पढ़ीं। इनमें शायरे अहले सुन्नत शहंशाहे तरन्नुम सैफुल्लाह सुल्तानी साहब सम्भली भी शामिल थे।
इस अवसर पर जेनेटा (बरेली) अल्लामा मौलाना मुफ्ती सय्यद रिहान मियां साहब क़िब्ला ने पैगंबर मोहम्मद ﷺ के जीवन चरित्र, भाईचारे, शांति और इंसानियत के संदेशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार दोआल दुनियां में तशरीफ़ क्यों लाए, इस बात पर गौर करना चाहिए। उन्होंने मुसलमानों से तमाम बुराईयों से बचने और नेक रास्ते पर चलने को कहा।
कादरी मस्जिद के इमाम मौलाना नूरमोहम्मद तहसीनी साहब क़िब्ला ने देश और दुनिया में अमन-चैन, भाईचारे और सलामती के लिए विशेष दुआएं मांगीं। कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। नूरी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना फारूख अख्तर ने भी नात-ए-पाक पढ़ी। खतीब ए अहले सुन्नत हजरत मौलाना अब्दुल मुस्तफा साहब बरेली शरीफ ने 12 रबीउल अव्वल और हजरत मोहम्मद ﷺ की विलादत के बारे में जानकारी दी। खतीब ए अहले सुन्नत हजरत मौलाना आज़ाद ने लोगों को नमाज कायम करने और पैगंबर मोहम्मद ﷺ के बताए रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया।
जलसे में ये लोग रहे मौजूद…
इस दौरान शायरे अहले सुन्नत मौलाना तनवीर, मौलाना सगीर, तालिब बरकाती, नवी हसन, इस्तकार, छोटे खान, शरीयत रजा, रिहान रजा, पत्रकार सय्यद शाहिद अली, रिपोर्टर मखदूम खान, रियाज बाबू, रिजवान, शरीफ, अलीशाह, आमिर, बबलू, रहीश अहमद, अब्दुल राजिक, अब्दुल कय्यूम और आरिश रजा सहित कई लोग मौजूद रहे।

