बदायूँ जनमत। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में प्रभारी जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आज शनिवार को जनपद में समय प्रातः 10 बजे से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।
प्रभारी जनपद न्यायाधीश रिन्कू द्वारा जनपद न्यायालय परिसर में माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पण कर एवं दीप प्रज्जवलित करके राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर कहा गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत को सम्पूर्ण राष्ट्र में न्याय पर्व के रूप तथा जन-कल्याणकारी दिवस के रूप में आयोजित किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त समस्त न्यायिक अधिकारीगण व बैंक अधिकारीगण को अधिक से अधिक वादों के निस्तारण के लिए अग्रिम बधाई दी।
अंकित रस्तोगी अपर सिविल जज द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि आम-जन न्यायालय में लम्बित विवादों जैसे आपराधिक शमनीय वाद, एनआई एक्ट-अन्तर्गत धारा 138 मोटर दुर्घटना सम्बन्धित वाद, वैवाहिक/पारिवारिक विवाद श्रम सम्बन्धी वाद, भूमि अधिग्रहण सम्बन्धी वाद किरायेदारी, ट्रैफिक चालान, राजस्व बाद, विद्युत बिल आदि विवादों का निस्तारण इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से करवा सकते है।
राष्ट्रीय लोक अदालत में माननीय प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, एवं माननीय अपर प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, बदायूं द्वारा अपने न्यायालयों में आपसी समझौते के आधार पर कुल 102 पारिवारिक विवादों का निस्तारण किया गया। पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण बदायूँ द्वारा कुल 86 मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाओं का निस्तारण कर अंकन 5,20,81,800/- रुपये की धनराशि पीड़ितों को बतौर क्षतिपूर्ति दिलायी गई।
श्रीमान अध्यक्ष, न्यायालय उपभोक्ता फोरम द्वारा 5 वादों में से 4 वाद का निस्तारण कर अंकन 19,46,496/- रुपये की धनराशि पीड़ितों को बतौर क्षतिपूर्ति दिलायी गई। श्रीमान अध्यक्ष, न्यायालय स्थाई-लोक अदालत द्वारा 20 वादों में से 2 वाद का निस्तारण किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, द्वारा लगभग कुल 1954 मामलों का निस्तारण
उक्त राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन से सम्बन्धित वादों में भारत संचार निगम लिमिटेड के 6 विद्युत विभाग के 1159 राजस्व सम्बन्धित 395 मामले 870 स्थानीय निकाय के मामले, विभिन्न बैंकों के मामले एवं अन्य प्रकार के लगभग 43993 मामले थे। इस प्रकार लगभग कुल 46617 प्री-लिटिगेशन मामलों का एवं न्यायालयों में लम्बित फौजदारी एवं सिविल वादों में लगभग 7854 वादों का निस्तारण हुआ। इस प्रकार उक्त राष्ट्रीय लोक अदालत में लगभग कुल 56425 वादों का निस्तारण हुआ। जिसमें समस्त वादों के अन्तर्गत लगभग अंकन 54035895/- रूपये मात्र की धनराशि वसूल की गई।

