मुंबई आझाद नगर में जबरन घर खाली कराने वाले गुंडे मुरुगनंथम अभिमन्यु की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

मुंबई जनमत

सैय्यद जाहिद अली रियासत !

मुंबई जनमत। मुंबई शाहू नगर पुलिस थाना में दर्ज अपराध मामले के आरोपी मुरुगनंथम अभिमन्यु की अग्रिम जमानत याचिका बृहन्मुंबई सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी है। बृहन्मुंबई सत्र न्यायालय के न्यायालय कक्ष संख्या 34 के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.के. उपाध्याय ने 29 सितंबर को अग्रिम जमानत याचिका पर यह आदेश दिया है। वहीं इस प्रकरण में सामाजिक कार्यकर्ता संजय रमेश भालेराव स्वयं अदालत के समक्ष उपस्थित रहे और आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया।
न्यायालयीन आदेश के अनुसार, दिनांक 6 सितंबर 2026 को शाम करीब 6.30 बजे आझाद नगर परिसर में तोड़क कार्रवाई की पृष्ठभूमि में स्थानीय निवासियों की बैठक चल रही थी, तभी विवाद और मारपीट की घटना होने का आरोप है। उक्त निवासियों ने मांग की थी कि साईंबाबा मंदिर में गणेश उत्सव में गणपति का आगमन होने वाला है, इसलिए मंदिर को फिलहाल न तोड़ा जाए। इसी दौरान अभिनंदन मुरगन और उसके साथियों ने स्थानीय लोगों के साथ मारपीट की।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी मुरुगनंथम अभिमन्यु और अन्य सह आरोपी घटनास्थल पर आए। इसके बाद मारपीट होने तथा एक आरोपी द्वारा लोहे की रॉड का इस्तेमाल किए जाने का आरोप FIR में किया गया है। इस मामले में शाहू नगर पुलिस थाना में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता संजय रमेश भालेराव द्वारा अदालत के समक्ष रखे गए पक्ष के अनुसार, धारावी पुनर्विकास की पृष्ठभूमि में संबंधित परिसर के निवासियों में भय और दबाव का माहौल बन गया था। भालेराव ने अदालत के ध्यान में यह आरोप लाया कि आरोपी मुरुगनंथम अभिमन्यु अदानी नवभारत मेगा डेवलपर से संबंधित कार्य के लिए परिसर में सक्रिय था और घर खाली कराने के लिए निवासियों पर दबाव व धमकी दी जा रही थी, ऐसी शिकायतें स्थानीय लोगों द्वारा की जा रही थीं। यह आरोप भालेराव द्वारा अदालत के समक्ष लगाए गए हैं। फिलहाल इस दावे के संबंध में कोई स्वतंत्र प्रशासनिक या न्यायालयीन निष्कर्ष होने का उल्लेख जमानत आदेश में नहीं है।
भालेराव ने आगे यह भी कहा कि पुनर्विकास का विरोध करने वाले या अपने अधिकारों की बात रखने वाले निवासियों को धमकाए जाने की शिकायतें उनके ध्यान में आई थीं। इसलिए उन्होंने अदालत के समक्ष यह आशंका व्यक्त की कि यदि आरोपी को अग्रिम जमानत मिलती है तो वह फिर से उसी परिसर में जाकर निवासियों या गवाहों पर दबाव डाल सकता है।

मेरा घटना से संबंध न होते हुए भी फंसाने का प्रयास : भालेराव

संजय भालेराव ने अदालत के समक्ष यह भी रखा कि संबंधित घटना से उनका प्रत्यक्ष संबंध न होते हुए भी उनका नाम मामले में घसीटने का प्रयास हुआ। उनके अनुसार, उन्होंने अपनी भूमिका से संबंधित उपलब्ध साक्ष्य व परिस्थितियां जांच एजेंसी के ध्यान में ला दी हैं, और उन्हें झूठे तरीके से फंसाने का प्रयास किया गया, ऐसा उनका पक्ष है।
इन बातों का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोपी की पृष्ठभूमि और उसके विरुद्ध पहले दर्ज अपराधों की ओर भी अदालत का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि आरोपी के विरुद्ध नौ पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज हैं।

राज्य सरकार का भी अग्रिम जमानत पर कड़ा विरोध…

राज्य सरकार की ओर से विद्वान अतिरिक्त सरकारी अभियोजक ज्योती सावंत ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी इस मामले का मुख्य आरोपी है। आरोपी और शिकायतकर्ता एक ही परिसर में रहते हैं, इसलिए गवाहों पर दबाव डालने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
साथ ही, अपराध में इस्तेमाल किया गया कथित हथियार अभी जब्त किया जाना बाकी होने के कारण आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ आवश्यक है, ऐसा भी सरकारी पक्ष ने रखा।
न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणियां दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि FIR में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध प्रथम दृष्टया सामग्री के अनुसार घटना में आरोपी की सहभागिता दिखाई देती है।

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