मुंबई जनमत। सन् 1888 में स्थापित कला संस्था द बॉम्बे आर्ट सोसायटी के पदाधिकारियों ने आगामी 3 अक्टूबर को ‘चुनाव नियोजन’ घोषित किया है। इसके लिए एक संकल्प पैनल घोषित किया गया है। सोसायटी के पदाधिकारी लगभग 15 वर्षों से पदाधिकारी समिति के पदनामों के अनुसार पद पर हैं।
सोसायटी वर्ष 2026 में 138 वां वर्ष पूर्ण करने वाली इस संस्था ने कई बदलाव, अड़चनें, उतार-चढ़ाव और बहुत सारी कड़वी सच्चाई अनुभव की है। “सार्वजनिक न्यास” वाली इस संस्था के सभी मतदाताओं में प्रामाणिक, पारदर्शी विचारों के संस्कार वाले आजीवन सदस्यों ने संस्था के “पुनरुज्जीवन” का संकल्प किया है। यह ‘संकल्प’ आप में से प्रत्येक जागरुक कलाकार की कला प्रज्ञा को ऊर्जा देने के इरादे से, स्थापित लोगों के विरोध के लिए 3 अक्टूबर 2026 को घोषित चुनावी मैदान में संकल्प पैनल खड़ा है।
द बॉम्बे आर्ट सोसायटी द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता में बताया गया कि मूल रूप से 3 अक्टूबर चुनाव की तारीख घोषित होने की जानकारी बहुत कम सदस्यों को है या चुनाव घोषित होने की खबर देर से पता चली है। आप सभी मतदाता मुंबई और मुंबई के बाहर महाराष्ट्र और महाराष्ट्र के बाहर भी बिखरे हुए हैं, इसलिए आपको इस माध्यम से जानकारी देने का एक प्रभावी प्रयास कर रहे हैं।
आप सभी संवेदनशील और जागरुक मतदाता हैं और संकल्प पैनल में प्रत्येक उम्मीदवार आप में से ही एक है और विशेष रूप से संवेदनशील, जागरूक और ईमानदार दृश्य कलाकार है, इसलिए हम मौजूदा और 15 वर्षों से कार्यरत (?) पदाधिकारियों के खिलाफ क्यों चुनाव लड़ रहे हैं? इसका विस्तृत लेकिन कुछ मुद्दों के आधार पर यह घोषित कर रहे हैं..!! आप मतदान करने मुंबई आकर हमें मतदान कर संस्था के पुनरुज्जीवन का अवसर देकर प्रोत्साहन दें, ऐसी विनती कर रहे हैं। पिछले वर्ष 10 अगस्त 2025 को मौजूदा कमेटी में “द बॉम्बे आर्ट सोसायटी” के माननीय सचिव ज्येष्ठ शिल्पकार चंद्रजित यादव का लंबी बीमारी से दुखद निधन हो गया। (आज भी सार्वजनिक न्यास वाली उक्त सोसायटी के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने “नोडल ऑफिसर” के रूप में दर्ज शिल्पकार स्व. यादव का नाम अब तक नहीं बदला है, जो आज भी उक्त संस्था के नाम की लिंक पर दिखता है) इतनी भी संवेदनशीलता की परवाह न करने वाले मौजूदा पदाधिकारियों ने तो असत्य, अपूर्ण और अधिकृतता का कानूनन आधार न होने वाली जानकारी सभी सोशल मीडिया पर घोषित कर एक प्रकार से जनता को गुमराह तो किया ही है तथापि “सार्वजनिक न्यास” का अक्षम्य अपमान किया है। इसलिए ऐसे गैरजिम्मेदार लोगों को, जिन्होंने 2015 से माननीय धर्मादाय आयुक्त कार्यालय में नियमानुसार चेंज रिपोर्ट ही आज तक जमा नहीं की है। इसलिए जो मंडल अवैध है। उन्हें चुनाव 2026 में पराजित कर संकल्प पैनल को सदस्य मतदाताओं ने विजयी करना चाहिए ऐसी विनती हम कर रहे हैं।
पिछले 15 वर्षों में अगर बॉम्बे आर्ट सोसायटी के कामकाज में झांक कर देखा जाए तो 2002 तक यह संस्था जहांगीर आर्ट गैलरी के एक छोटे से कमरे में बंद थी। प्रो. विजय राउत के नेतृत्व वाले नए पैनल को 2002 में सफलता मिली और वे इस संस्था पर आए थे। आगे 2010 तक इस पैनल के लोगों ने इस संस्था का कायापलट करने का प्रयास किया। म्हाडा द्वारा छीना गया प्लॉट हमारे नेतृत्व में वापस लाने से लेकर बांद्रा में कला संकुल निर्माण का काम, लाइफ टाइम और अन्य महत्वपूर्ण अवाईस की संख्या इस सोसायटी के वार्षिक कला प्रदर्शनी के समारोह के समय प्रदान करना शुरु किया।
लेकिन 2010 के बाद चुने गए लोगों ने 2010 से 2026 यानी पूरे 15 साल इस सोसायटी पर कार्यरत रहकर भी कुछ भी काम नहीं किया। कुछ शौकीन कलाकारों की मेंबरशिप को छोड़कर व्यावसायिक कलाकारों साधारण सदस्यों की पूरी सूची भी नहीं बना पाए हैं। वार्षिक प्रदर्शनी के अलावा उन्होंने कोई अन्य उपक्रम नहीं चलाया। वार्षिक बैठक में लिए गए किसी भी निर्णय का कार्यान्वयन 15 वर्षों में मौजूदा पदाधिकारियों ने नहीं किया है। संस्था का बिल्डर के साथ हुए जगह के व्यवहार का घोटाला अभी भी सुलझाया नहीं गया है। संस्था के पास आर्थिक प्रायोजकों से चंदा जुटाने के उपाय होते हुए भी उनके घोटाले के कारण वांछित मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। 1888 में जिस उद्देश्य से यह संस्था स्थापित हुई थी और भारतीय इतिहास में संस्था का नाम बड़े आदर से लिया जाता था, उस प्रतिष्ठा को 15 वर्षों में मौजूदा पदाधिकारियों ने अधोगति तक पहुंचा दिया है।
पैनल में ये प्रमुख लोग हैं शामिल…
द बॉम्बे आर्ट सोसायटी द्वारा घोषित किए गए पैनल में अध्यक्ष पद के लिए प्रोफेसर विजय राऊत, सचिव के लिए डॉक्टर गजानन शीपल, कोषाध्यक्ष के लिए भावना सोनावाने और सदस्य पद के लिए विठ्ठल राव लोखनडेकर, प्रोफेसर नंदकिशोर मानकर, प्रोफेसर रमेश भोसले, प्रोफेसर संजय साबले, प्रोफेसर दीपक पाटिल, डॉक्टर मिनल राजुकर शिंदे, अश्विन कदम का नाम शामिल है।


