बदायूँ जनमत। PET परीक्षा में शामिल होने के लिए बदायूं पहुंचे दूरदराज के क्षेत्रों के लगभग 80 परीक्षार्थियों के लिए सद्भावना मंच की ओर से निःशुल्क ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्था कराई गई। मंच की टीम रात में ही रेलवे स्टेशन और रोडवेज पहुंच गई थी, जहां दूसरे जनपदों से आने वाले परीक्षार्थियों से संपर्क कर उनकी समस्याओं का समाधान किया गया और उन्हें ठहरने की उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई गई।
खास बात यह रही कि PET परीक्षा के लगातार तीसरे चरण में भी सद्भावना मंच बदायूं ने अपनी सेवा की इस मुहिम को जारी रखा। इससे पहले आयोजित दोनों चरणों की परीक्षाओं में भी मंच के सदस्यों द्वारा परीक्षार्थियों के लिए निःशुल्क ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई थी। इस बार भी लगभग 80 परीक्षार्थियों के लिए ठहरने के साथ सुबह का नाश्ता और दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई, जिससे दूरदराज से आए छात्र-छात्राओं को काफी राहत मिली।
डॉ. इत्तेहाद आलम ने कहा कि युवाओं का भविष्य देश का भविष्य है। परीक्षा देने के लिए दूसरे जनपदों से आने वाले छात्र-छात्राओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसी उद्देश्य से यह पहल की गई है। लगातार तीनों चरणों में इस सेवा को जारी रखना हमारे लिए खुशी की बात है।
मुहम्मद शादाब ने कहा कि सद्भावना मंच का उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि जरूरत के समय लोगों के काम आना है। रात में रेलवे स्टेशन और रोडवेज पहुंचकर परीक्षार्थियों की मदद करना और उनके रहने-खाने की व्यवस्था करना हमारे सामाजिक दायित्व का हिस्सा है।
सरफराज अब्बासी ने कहा कि जब दूसरे जनपदों से बच्चे परीक्षा देने आते हैं तो उन्हें रहने, खाने और आने-जाने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हमने महसूस किया कि ऐसे समय में उनकी मदद करना बेहद जरूरी है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि PET परीक्षा के तीनों चरणों में मंच के साथियों ने सेवा भाव से बच्चों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की।
अशर खान ने कहा कि समाज की असली खूबसूरती एक-दूसरे के काम आने में है। लगातार तीन चरणों में परीक्षार्थियों की मदद करना मंच की सामूहिक जिम्मेदारी और सेवा भावना को दर्शाता है।
सद्भावना मंच के सदस्यों ने कहा कि इंसानियत की सेवा, आपसी भाईचारा और जरूरतमंदों की मदद ही मंच की असली पहचान है। मंच भविष्य में भी इसी तरह सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में अपनी भागीदारी निभाता रहेगा। आयोजन को सफल बनाने में सुबोध यादव, ज़ुबैर अहमद, मुहम्मद सलमान अंसारी, रमेश प्रजापति आदि का विशेष योगदान रहा।


