एस• शाहिद अली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है। ऐसे में समर्थन और बगावत का भी दौर शुरू हो चुका है। वहीं अधिकतर नेतागण विधानसभा की कुर्सी पाने के लिए अपनी गोटियां बिछाने में लगे हुए हैं। कुछ नेता विधायक बनने की होड़ में सत्ता का सुख भी त्यागने को तैयार हैं, तो वहीं वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे नेताओं को टिकिट न मिलने डर सता रहा है। ऐसे नेताओं ने सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार के लिए अपने कार्यकर्ताओं को जुटा दिया है। जो धमकी भरे अंदाज़ में अपने नेता को टिकिट देने की मांग कर रहे हैं।
ऐसे ही कई मामले बदायूं जिले में देखने को मिल रहे हैं। हालांकि बदायूं जनपद में समाजवादी पार्टी की बात करें तो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव गुटबाजी समाप्त करने की कोशिश में लगे हुए हैं। बदायूं जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी भी चाचा के अनुसार ही घोषित होंगे। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि चाचा के पुत्र आदित्य यादव बदायूं से सांसद हैं। आदित्य यादव के संसदीय क्षेत्र में चाचा शिवपाल का खास दख़ल है।
शेखूपुर विधानसभा पर चाचा ने बड़ी गुटबाजी को खत्म किया
बदायूं जिले में समाजवादी पार्टी में सबसे बड़ी और पुरानी गुटबाजी की बात करें तो शेखूपुर विधानसभा पर चली आ रही थी। यहां समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष आशीष यादव के पुत्र हिमांशु यादव विधायक हैं। वहीं दूसरी ओर पूर्व मंत्री आबिद रज़ा गुटबाजी के चलते शेखूपुर विधानसभा से टिकिट की दावेदारी पेश कर रहे थे। ऐसे में उन्होंने मुस्लिम, यादव के साथ-साथ दलितों में भी खासी पैठ बना ली थी। नाराज़ वोटर खुलकर आबिद रजा के साथ खड़े थे। लेकिन हाल ही में चाचा शिवपाल यादव के दखल ने शेखूपुर विधानसभा की राजनीति को बदल कर रख दिया। चाचा ने दोनों धुर विरोधियों को एक साथ लाकर एकता की मिठाई खिला दी। जिसके बाद बदायूं जिले की सबसे बड़ी गुटबाजी समाप्त होती नज़र आ रही है।
अब दातागंज विधानसभा पर दिखने लगी गुटबाजी
दातागंज विधानसभा की बात करें तो यहां पूर्व विधायक सिनोद शाक्य की भाजपा से सपा में हुई एंट्री ने सबको चौका दिया है। इस एंट्री ने समाजवादी पार्टी की वर्षों से सेवा कर रहे नेतागण क्रमशः कैप्टन अर्जुन, पूर्व विधायक प्रेमपाल सिंह यादव और सुनीता पाल को कश्मकश में डाल दिया। इन नेताओं के कार्यकर्ताओं में पहले से ही गुटबाजी चली आ रही थी, लेकिन सिनोद शाक्य के सपा में आने के बाद सोशल मीडिया पर खुलकर गुटबाज़ी सामने आ गई है।
सुनीता पाल के कार्यकर्ता अखिलेश यादव को धमकी देते नजर आ रहे हैं। एक कार्यकर्ता अभिषेक पाल ने लिखा है कि “अगर समाजवादी पार्टी श्रीमती सुनीता पाल को विधानसभा दातागंज से टिकट नहीं देती है, तो पूरा पाल समाज इसका विरोध करके किसी अन्य पार्टी (जैसे BJP, BSP) को अपना वोट दे देगा।”


