बदायूँ जनमत। नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने में नामजद पिता को स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट तृतीय डॉ. मोहम्मद इलियास ने 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मुजरिम पिता पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी डाला गया है।
थाना सहसवान क्षेत्र के गांव निवासी व्यक्ति ने 15 जुलाई 2017 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक उसके भाई बृजपाल की पत्नी की एक साल पहले मृत्यु हो चुकी है। उसके भाई बृजपाल पुत्र होतीलाल ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने बृजपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट डॉ. मोहम्मद इलियास ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। मुकदमे के दौरान पीड़िता और उसके चाचा अपनी गवाही से मुकर गए और दुष्कर्म नहीं किए जाने की बात कोर्ट में कही। कोर्ट ने अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रदीप भारती, सीपी सिंह और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस को सुना। कोर्ट ने बेटी के साथ दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी पिता को मुजरिम ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

कोर्ट में आरोपी पिता ने तर्क दिया कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसने विवेचना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वह निर्दोष है। बाद में उसके भाई ने भी कोर्ट में यह बयान दिया कि उसे अपने भाई द्वारा उसकी बेटी के साथ गलत काम करने की कोई जानकारी नहीं है। वह इस बात से भी मुकर गया कि उसने कोई तहरीर या कोई बयान दिया था। हालांकि तहरीर पर अगूंठा लगाने की बात उसने स्वीकार की। जब कोर्ट में उससे पूछा गया कि उसने अभी तक अपने भाई को जेल में क्यों रखा तो उसने कहा कि उसके भाई ने कोई गलत काम नहीं किया। केवल जमीन के विवाद में वह उसे फंसाना चाहता था।
आरोपी पिता तीन भाई हैं। जिस भाई ने तहरीर दी थी, उसने इसे तीसरे भाई पर डाल दिया। उसने कहा कि उसका तीसरा भाई ही तहरीर टाइप कराकर लाया था, जिस पर उसने अंगूठा लगाने को कहा था तो उसने लगा दिया। उसका आरोपी भाई जमीन बेचने की बात कह रहा था तो उसने उसे फंसा दिया। हालांकि कोर्ट ने पीड़िता और उसके चाचा को पक्षद्रोही घोषित करते हुए आरोपी पिता को सजा सुना दी।

