बदायूॅं जनमत। समाजवादी पार्टी के नेता व सांसद धर्मेन्द्र यादव ने मानसून सत्र के बजट पर हुई चर्चा में भाजपा पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि श्रद्धये नेताजी ने हम समाजवादियों को न्याय और इंसाफ के लिए लड़ना सिखाया है। जिस लड़ाई को हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में लड़ रहे हैं। आज देश की 140 करोड़ आबादी में लगभग 95 फीसदी लोग बर्बाद हो चुके हैं, एनडीए सरकार के 11वें बजट में सबसे ज्यादा गरीबों को नजर अंदाज किया गया है। 2014 में यूपीए सरकार में किसानों के लिये 5.5 फीसदी बजट था जो घटकर अब 3.15 फीसदी रह गया है। 2013 में शिक्षा के लिये 4.77 था जो अब ढाई फीसदी रह गया है। यह बजट पूरी तरह से गरीब विरोधी, किसान विरोधी, नौजवान विरोधी, अल्पसंख्यक विरोधी, छात्र विरोधी, दलित विरोधी, पिछड़ा विरोधी तथा मजदूर विरोधी है।आगे कहा कि श्रद्धये नेताजी ने कहा कि चुनाव में किये गए वादों को पूरा न करना भी एक भ्रष्टाचार होता है। कहाँ है युवाओं को दो करोड़ राजगार, कहाँ है किसानों का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य।किसानों के खाद के कट्टे को दो बार मे 10 किलो घटा दिया, इसी तरह चलता रहा तो आने वाले समय मे कट्टे में सिर्फ 10 किलो ही यूरिया रह जायेगी।दिल्ली की सीमा पर सैकड़ों किसान शहीद हो गए पर इस संवेदनहीन सरकार को कोई फर्क नही पड़ा। शिक्षा पर लगातार बजट घटाया जा रहा है, देश के सभी जाने-माने शिक्षा संस्थान बर्बाद किये जा रहे हैं। देश के किसी भी शिक्षा संस्थान में दलित, पिछड़ा अथवा आदिवासी वाईस चांसलर नहीं है। इनमें होने वाली प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति सिर्फ उसी की होती है जो आरएसएस का फंडामेंटल कोर्स किये होता है। मेरा इस सरकार पर खुला आरोप है कि शिक्षा को चंद उद्योगपतियों के हाथ मे देकर गरीब, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, आदिवासियों को शिक्षा से वंचित करना चाहती है।
मंडल आयोग के लागू होने के पश्चात पिछड़े व दलितों को रोकने के लिये यह सरकार संविदा कर्मी प्रक्रिया व निजीकरण को लेकर आई है। इसी साजिश के तहत भाजपा सरकार आरक्षण को खत्म करना चाहती है।उत्तर प्रदेश की जनता ने इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार दी है, अयोध्या की हार से खिन्न होकर पूरे बजट में उत्तर प्रदेश का एक बार भी नाम नही लिया गया। आगे कहा मेरी मांग है कि बिहार की तरह उत्तर प्रदेश को भी विशेष पैकेज दिया जाय। 

