बदायूॅं जनमत। थाने में फर्जी रिपोर्ट लिखकर ग्रामीण की गिरफ्तारी के मामले में कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन इंस्पेक्टर, चार दरोगा समेत 12 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। पीड़ित का आरोप था कि पुलिस ने उसे पीटा। जातिसूचक शब्द कहें। फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेज दिया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
उघैती थाना क्षेत्र के गांव रियोनाई निवासी प्रेमपाल ने कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वह दस अप्रैल 2025 को अपने मामा रेशमपाल के घर बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव सिरासौल सीताराम पट्टी गए थे। मामा के घर इसी गांव के माखन, उपेंद्र, पप्पू व अतुल आ गए। चारों आरोपियों ने एकराय होकर उनसे गाली गलौज की। मारपीट को उतारू हो गए। वह इस घटना की तहरीर देने बिल्सी थाने गए।
इन पुलिसकर्मियों पर लगाया आरोप…
आरोप है कि थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह पुंडीर, एसआई रामसेवक सिंह राठौर, मुनेंद्र सिंह, शैलेंद्र प्रताप सिंह, सोमवीर सिंह और कांस्टेबल धर्मेंद्र, कुलदीप और रविंद्र सिंह ने उन्हें जबरन पकड़कर हवालात में बंद कर दिया। जब उसने विरोध किया तो पुलिसकर्मियों ने उसे जातिसूचक शब्दों कहे। गाली गलौज की। इसके बाद पट्टे से पीटा। इससे वह घायल हो गए। मारपीट के दूसरे दिन पुलिस ने उनका मेडिकल परीक्षण कराया। लेकिन बिल्सी सीएचसी पर हुए मेडिकल रिपोर्ट में उनकी चोटों का उल्लेख नहीं किया गया। इसके बाद उनपर तमंचा-कारतूस दिखाकर फर्जी रिपोर्ट दर्ज की गई और गिरफ्तार कर लिया।
एनकाउंटर करना चाहते थे पुलिसकर्मी…
प्रेमपाल का आरोप है कि पुलिसकर्मी उनका उसी रात फर्जी एनकाउंटर करना चाहते थे। लेकिन उनकी गिरफ्तारी की जानकारी मामा के घर व परिजनों को थी। इसके चलते पुलिस उन्हें रातभर घूमती रही। फिर से उन्हें हवालात में रातभर बंद रखा। वहीं, जब वह जेल पहुंचे तो उन्होंने मेडिकल परीक्षण के लिए कहा, लेकिन जेल में भी उनका मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया। बिल्सी इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।


