बदायूॅं जनमत। 30 साल पहले शादी कर हिंदू बनी महिला अपने साथ जिस बेटे को लेकर आई थी। बुधवार को उसकी मौत हो गई। इसके अंतिम संस्कार को लेकर उस समय बखेड़ा खड़ा हो गया। जब मां ने उसका अंतिम संस्कार मुस्लिम रिवाज से करने का एलान कर दिया। गांव वालों ने एतराज किया तो पुलिस ने रातभर लाश को पहरे में रखा। बृहस्पतिवार सुबह को मृतक के सभी बहन भाई आ गए तब कहीं रजामंदी हुई और फिर हिंदू रीति-रिवाज से ही उसका अंतिम संस्कार किया गया।
दातागंज थाना क्षेत्र के गांव सुखौरा निवासी रघुवीर सिंह पुलिस सिपाही थे। उनकी मौत के बाद उनका बेटा ओमकार सिंह पांडा ने बिहार में एक मुस्लिम युवती से शादी कर ली। शादी के बाद युवती ने अपना धर्म परिवर्तन कर नाम लक्ष्मी रख लिया था। इसी नाम से उसका आधार कार्ड भी है। करीब पांच साल पहले ओमकार सिंह पांडा की मौत हो गई।
शराब पीने का आदी था युवक…
बताते हैं कि लक्ष्मी पर ओमकार सिंह पांडा से शादी करने से पहले एक बेटा था। उसका नाम संजू रखा गया। संजू शराब का आदी था और पिछले दिनों से बीमार चल रहा था। उसकी शादी भी बिहार से हुई है। बुधवार को उसकी मौत हो गई। उसकी मौत के बाद उसकी मां लक्ष्मी ने यह कहकर बखेड़ा खड़ा कर दिया कि उसकी अंत्येष्टि मुस्लिम रीति-रिवाज से दफना कर की जाएगी। इस पर गांव में विरोध हो गया।
गांव वालों का कहना था कि अबतक के सभी कार्य उनके हिंदू होने के नाते सनातनी परंपरा के अनुसार हुए हैं तो अब यह अनोखा और विपरीत काम क्यों होगा। इस मामले में कोई बवाल न खड़ा हो जाए। इसलिए सूचना पर पुलिस भी गांव पहुंच गई, तब शव गांव में ही रखा रहा। गांव वालों का कहना था कि जब तक मृतक के भाई-बहन जो बाहर हैं, नहीं आ जाते तब तक अंतिम संस्कार न किया जाए। इस पर पुलिस ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया। रात भर पुलिस ने वहां रहकर शव की निगरानी की। मृतक का दिल्ली में रहने वाला भाई बिरजू भी दिल्ली से आ गया और सभी बहनें भी पहुंच गईं। सबकी राय जानी गई। गांव वालों से भी बात हुई तब उसकी मां मानी। बृहस्पतिवार सुबह हिंदू रीति-रिवाज से ही अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई ने मृतक को मुखाग्नि दी। गांव के श्मशान घाट में उसकी चिता जलाई गई। पूरी रात पहरे पर रही पुलिस को अंतिम संस्कार के बाद राहत मिली।

