बरेली बवाल; मौलाना तौकीर रज़ा की मुश्किलें बढ़ेंगी, NSA लगाने की तैयारी में है योगी सरकार

उत्तर प्रदेश

बरेली जनमत‌। इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अधिकारी उन्हें कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेने की तैयारी कर रहे हैं। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद मौलाना तौकीर रजा को जल्द बरेली लाए जाने की संभावना नहीं है। पुलिस और जिला प्रशासन कथित तौर पर रज़ा को NSA के प्रावधानों के तहत हिरासत में रखने के अपने फैसले पर अड़े हुए हैं।
अधिकारी उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि और बरेली में हाल में हुई अशांति का हवाला दे रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी अनुरोध किया है कि कानून-व्यवस्था की समस्याओं से बचने के लिए उनकी सभी अदालती सुनवाई ‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग’ के माध्यम से की जाए। बरेली रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) अजय कुमार साहनी ने कहा, “मौलाना तौकीर रजा को रासुका के तहत हिरासत में लेने के पर्याप्त आधार हैं। उनके रिकॉर्ड और शहर की नाजुक स्थिति को देखते हुए, बरेली में उनकी मौजूदगी उचित नहीं है।” उन्होंने बताया कि पुलिस ने तौकीर रजा के साथियों पर शिकंजा कस दिया है और 26 सितंबर की हिंसा से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया वीडियो की जांच के बाद और नाम जोड़े जा रहे हैं।

अब तक 88 लोग गिरफ्तार…

पुलिस के अनुसार 17 नए आरोपियों की पहचान की गई है और बुधवार को दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिससे गिरफ्तारियों की कुल संख्या 88 हो गई है। 26 सितंबर को जुम्मे की नमाज़ के बाद कोतवाली इलाके में एक मस्जिद के बाहर जमा हुई भारी भीड़ और पुलिस के बीच झड़पें हुईं थीं। यह झड़प कथित तौर पर ‘आई लव मुहम्मद’ पोस्टर विवाद को लेकर रजा द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शन को रद्द करने को लेकर हुई थी। अब तक दस FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें 125 नामजद लोग और 3,000 से ज़्यादा अज्ञात लोग हैं।
एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि रफ़ीक बेग, मजीद बेग, रिजवान, नासिर खान, लईक अहमद, शफ़ील अहमद, जाफर, शकील और हसीन समेत कई आरोपियों की पहचान सक्रिय दंगाइयों के रूप में की गई है। अनुराग आर्य ने कहा, “सोशल मीडिया फुटेज, वीडियो निगरानी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर उनके नाम जोड़े गए। आरोपियों के दंगा स्थलों पर मौजूद होने का पता चला। हम नए सॉफ्टवेयर टूल डंप डेटा और सीसीटीवी फुटेज का मिलान करके उनकी संलिप्तता की पुष्टि करने में कारगर साबित हुए हैं।”

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