बरेली जनमत। यूजीसी के नए नियमों को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। इस बीच यूपी के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जैसे ही खबर फैली तुरंत उनके समर्थन में ब्राह्मण सभा भी उतर आई। समाज के अन्य संगठनों ने भी अग्निहोत्री का साथ देते हुए सरकार की तीखी आलोचना की है। इस दौरान ‘UGC हटाओ, देश बचाओ’ और ‘काला कानून वापस लो’ के नारे लगाए गए।
ब्राह्मण सभा के लोगों का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा तो शुरुआत है, अभी तो विरोध-प्रदर्शन और तेज होगा। सामान्य वर्ग के साथ अत्याचार हो रहा है और हमारे समाज के नेता हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं। उन्हें कोई ही फर्क नहीं पड़ रहा है। इतनी शर्म नहीं है कि अपना इस्तीफा दे दें और सरकार से कहें कि यह ‘काला कानून’ वापस ले।
बकौल ब्राह्मण सभा- अगर ये कानून वापस नहीं लिया गया तो इतने इस्तीफे हो जाएंगे कि इनसे संभाले नहीं जा सकेंगे। हम क्रांति करने वाले लोग हैं। हमारा इतिहास मंगल पांडे और चंद्रशेखर आजाद वाला है। सरकार का ये कदम कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस्तीफे के बाद सिटी मजिस्ट्रेट का बयान
अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार पर ‘ब्राह्मण विरोधी’ होने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और बुजुर्ग संन्यासियों के साथ पुलिसिया दुर्व्यवहार, विशेषकर उनकी शिखा (चोटी) का अपमान, बर्दाश्त के बाहर है।
अग्निहोत्री ने यूजीसी के 13 जनवरी के नए नियमों पर भी आपत्ति जताई, जिसके तहत सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ ‘समता समिति’ के माध्यम से फर्जी शिकायतों और शोषण की आशंका जताई गई है। उन्होंने ब्राह्मण समाज के जनप्रतिनिधियों (सांसदों/विधायकों) पर भी निशाना साधा कि वे अपनी जाति के हितों पर चुप्पी साधकर कॉर्पोरेट कर्मचारियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह चुप्पी समाज के प्रति गंभीर अन्याय है।
इस्तीफा भेजने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यह कदम उन्होंने ब्राह्मण समाज के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए उठाया है। उन्होंने सभी ब्राह्मण सांसदों और विधायकों से तत्काल इस्तीफा देने और जनता के साथ खड़े होने की अपील की है। अग्निहोत्री के मुताबिक, यह नियम एकतरफा हैं और जनरल छात्रों के करियर और व्यक्तिगत जीवन को जोखिम में डाल सकते हैं।





