बदायूॅं जनमत। मन्दाकिनी साहित्य मंच के तत्वावधान में दिशा कान्वेंट जूनियर हाईस्कूल उसावां में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि नंदकिशोर पाठक ने की, जबकि संचालन महेश अग्निमुख ने किया। वहीं कार्यक्रम का शुभारंभ संतोष कुमार सिंह द्वारा माँ सरस्वती की वंदना से किया गया।
गोष्ठी में क्षेत्र के अनेक कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी सशक्त रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कवि एपी यादव ने अपनी रचना “भोला पन कब तक बेवफा पत्नियों का शिकार होता रहेगा, क्या ऐसे ही हर मुस्कान के नीले ड्रम में भरता रहेगा” सुनाकर सामाजिक विडंबनाओं पर प्रहार किया।
उसहैत से आए कवि नन्द किशोर पाठक ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कुंडली छंद के माध्यम से कुछ यूं पढा-
मंदिर के गहने चुरा हुए,
चंपत चंपतराय।
इस्तीफा दे दोष से,
खुद को रहे बचाय।
खुद को रहे बचाय,
पूछती देश की जनता।
सहसों हुए शहीद,
नहीं मंदिर ना बनता।
कैसे हो निर्दोष,
मुख्य थे तुम इस घरके।
जाओगे अब कहाँ,
चुरा गहने मंदिर के।।
कवि अमित अम्बर ने अपनी चर्चित पंक्तियाँ “निकल कर सामने जब भी कोई आए बड़ा बूढ़ा, यकीं मानो अदब से सर हमारा झुक ही जाता है” सुनाकर बड़ों के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कारों का संदेश दिया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। संतोष कुमार सिंह ने “हे पथिक सफलता के पथ का संघर्ष तुम्हें करना होगा, तज चिंता पथ के कांटों की आगे तुमको बढ़ना होगा” सुनाकर जीवन में संघर्ष और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
संचालक महेश अग्निमुख ने अपनी ओजस्वी पंक्तियाँ “ध्रुव से अटल हर पटल पर व्यवधान मेरा क्या करेगा, अहर्निश गतिमान है दिनमान मेरा क्या करेगा” प्रस्तुत कर आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का संदेश दिया। जगपाल ‘जग’ ने “आप से बिछड़े हुए हमको जमाना हो गया, अब तो अपना जख्म भी काफी पुराना हो गया” के माध्यम से विरह की मार्मिक अनुभूति व्यक्त की। मुशीर अहमद ‘मुशीर’ ने “ठीक वहीं पर सैय्यद का निशाना है, जहाँ पर मासूम परिंदों का आशियाना है” सुनाकर सामाजिक संवेदनाओं को स्वर दिया। वहीं रामानंद मिश्रा ने “मैं तेरी गली को आया करूं, तुम लॉबी में आ जाना, मैं हाल कहूँगा अपने दिल का, तुम अपने दिल की कहना” प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ कवि नंदकिशोर पाठक ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और ऐसी काव्य गोष्ठियां रचनात्मक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी कवियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।


