बदायूॅं जनमत। देखिये मेरे नबी की क्या निराली शान है, ऐसे ही सैकड़ों नात व मनकबत और ग़ज़ल के शेरों के ख़ालिक़ आले अहमद ज़ौक़ वज़ीरगंजवी के दसवे की फातिहा उनके निज निवास पर मुकम्मल हुई। फातिहा में नगर के हाफ़िज़ उलेमा एवं मोअज़्ज़िज़ लोग मौजूद रहे।
बताते चलें कि मशहूर शायर हिलाल बदायूंनी के वालिद एवं उस्ताद शायर आले अहमद ज़ौक़ वज़ीरगंजवी का पिछले सप्ताह इलाज के दौरान इंतकाल हो गया था। उनकी तदफीन निवास के नज़दीक मोहल्ला तकिया क़ब्रिस्तान में हुई जिसके बाद तीजा व अन्य रस्मों की अदायगी की गई। उनके दसवे की फातिहा में सबसे पहले मदरसे के बच्चों ने कुरानख्वानी मुकम्मल की बाद में नातख़्वानों ने उनके कलाम पढ़कर खिराजे अकीदत पेश किया।
नातख्वां नन्ने बाबू ने उनका शेर पढ़ते हुए कहा-
ज़ौक़ को भी रौज़ए सरकार का दीदार हो, इसके दिल में या इलाही बस यही अरमान है!
हाफ़िज़ इशरत ने ज़ौक़ साहब के नातिया शेर सुनाते हुए कहा-
इसे ऐ ज़ौक़ कहते हैं कमाले शाने यकताई, न सानी है मुहम्मद का न साया है मुहम्मद का!
दानिश वज़ीरगंजवी ने कहा-
मैं गुलामे मुस्तफा हूँ मेरे पास क्या नहीं है, मुझे मुस्तफा के दर से भला क्या मिला नहीं है!
ज़ियाउल हसन साबरी ने सुनाया-
अब और न गुलाम को तड़पाइये हुज़ूर, महफ़िल सजी हुई है चले आइए हुज़ूर!
हाफिज इरशाद ने कहा-
हश्र में फिर मिलेंगे मेरे दोस्तों, बस यही है पयाम आख़िरी आख़िरी!
मौलाना शमीम खान ने कलाम सुनाते हुए कहा-
जाता हूँ मैं दुनिया से मुझको न भुला देना, जब याद मेरी आये बख्शिश की दुआ देना!
इसके अलावा महफ़िल में हिंदुस्तान के मशहूर खतीब मुफ़्ती मीर सय्यद वसीम अशरफ, हाफ़िज़ अबरार अहमद, मुमताज़ नगर से हाफ़िज़ इरशाद, कदीरी मस्जिद से हाफ़िज़ इशरत, बनिया से हाफिज इरशाद, सरफराज अहमद फ़राज़, ज़ियाउल हसन साबरी, हाफ़िज़ ज़ीशान, सलीम क़ादरी, दानिश वज़ीरगंजवी, हाफ़िज़ मुईन, हाफ़िज़ दानिश, गयूर अली, मुश्फिक अली, मो असलम ने कलाम पेश करके खिराजे अकीदत पेश किया।
इधर महफ़िल में डॉ गुच्छन इरफान, सुलेमान सलमानी, निसार मंसूरी, इस्तखार मंसूरी, मशहूर शायर रोशन निज़ामी, मुहीउद्दीन, शमसूज़ज़्मा, क़मरूज़ज़्मा, मुशाहिद उर्फ मुज़म्मिल सैफ़ी, प्रधानाचार्य दाऊद अली, इरफान अली, हस्सान अली, जाबिर सैफ़ी, आलम रंगसाज आदि मौजूद रहे। नातख़्वानी के बाद सलाम शजरा एवं फातिहा होने के बाद तबर्रुक तक़सीम किया गया। महफ़िल के समापन पर डॉ हिलाल बदायूंनी ने सभी मेहमानों हाफिजों उलेमाओं का शुक्रिया अदा किया।


