बरेली जनमत। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का तीन दिवसीय 108वें उर्स-ए-रज़वी आज समापन हो गया। उर्स की सभी रस्में पूरी अकीदत के साथ दरगाह ताजुश्शरिया के सज्जादानशीन काज़ी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती मोहम्मद असजद रज़ा खां कादरी (असजद मियां) की सरपरस्ती में और जमात रज़ा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उर्स प्रभारी सलमान मियां की सदारत में व जामत रज़ा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां की निगरानी में उर्स स्थाल मदरसा जामियातुर्रजा में दोपहर 2:38 पर आला हजरत की कुल रस्म अदा की गई। जमात रज़ा के प्रवक्ता समरान खान ने बताया फज्र की नमाज़ बाद मदरसा जामियातुर्रजा में कुरान ख्वानी हुई और नात-ओ-मनकबत की महफिल सजाई गई। इसके बाद मदरसा जामियातुर्रजा में सुबह 10 से मुख्य कार्यक्रम का आगाज़ कारी शर्फोद्दीन ने कुरान शरीफ़ की तिलावत से किया। नातख्वा नईम रज़ा तहसीनी और सैय्यद कैफ़ी अली ने आला हज़रत की शान में कलाम पेश किए। देश-विदेश के दिखर उलमा-ए-इकराम और सज्जादागान ने आला हजरत की जिंदगी पर रौशनी डाली। इसके अलावा मुफ्ती सैय्यद गियास मियां (काल्पी शरीफ़), मुफ्ती सैय्यद सलाम बाबू (काज़ी शहर गुजरात), मुफ्ती फैजान मियां (काज़ी शहर रामपुर), मुफ्ती फुरकान मियां, मौलाना अनीस आलम (लखनऊ) मुफ्ती हुसैन बकाई आदि उलमा ने खिताब किया। दोपहर 2:38 पर सरकार आला हजरत इमाम अहमद रज़ा खां फाजिले बरेलवी के कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई। फातिहा कारी शर्फोद्दीन और कारी फैज़ू नबी ने शिज़रा अल्लामा मुहद्दिस-ए-कबीर जिया उल मुस्तफा और काज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद मियां ने देश में अमन-ओ-चैन, प्यार मोहब्बत और देश की तरक्की के लिए खुसूसी दुआ की। महफिल की निजामत मौलाना गुलजार ने की।
मंच पर हुस्साम मियां, हुम्माम मियां, मुफ्ती शमशाद हुसैन, मुफ्ती अख्तर हुसैन आलिमी, मुफ्ती अब्दुल मुस्तफा राधोल्वी, मुफ्ती शाहजाद आलम, मुफ्ती आशिक, मुफ्ती नश्तर फारूकी, मुफ्ती अफजाल, कारी काजिम, मौलाना सैय्यद अजीमुद्दीन अज़हरी, मौलाना शम्स, मौलाना शकील आदि लोग मौजूद रहें।
लंगर कमेटियों का रहा अहम योगदान…
जमात रज़ा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उर्स प्रभारी सलमान मियां और जामत रज़ा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां ने गुंसा, सानिया रानी, बिधौलिया, केशवपुर, तिलियापुर, पूरनपुर, अलीगंज, फतेहगंज, मुरादाबाद, अलावा, सीबीगंज आदि कमेटियों का शुक्रिया अदा किया और कहा उर्स-ए-आला हजरत के अवसर पर शहर भर में लगी विभिन्न लंगर कमेटियों ने इंसानियत और खिदमत की मिसाल पेश की। सभी लंगर कमेटियों के वालंटियर ने दिन-रात एक करके लाखों जायरीनों की सेवा की। उर्स के दौरान हजारों लंगर कमेटियों ने दरगाह से लेकर उर्स स्थाल और आसपास के क्षेत्रों में लंगर की व्यवस्था की। लाखों से अधिक जायरीनों को खाना, पानी, शरबत और चाय उपलब्ध कराई गई। स्थल पर सफाई का विशेष ध्यान रखा गया। जायरीनों ने शांति और भाईचारे का पैगाम दिया। 24 घंटे कई कमेटियों ने रात भर लंगर चलाया ताकि दूर से आए जायरीनों को कोई परेशानी न हो।
ऑनलाइन देश-विदेश से जुड़े लाखों जायरीन…
आईटी सेल प्रभारी अतीक अहमद ने बताया तीन दिवसीय 108वें उर्स-ए-रज़वी का लाइव प्रसारण मिक्सर, फेसबुक और यूट्यूब के जरिए दुनिया भर में सुना गया। जो जायरीन किसी कारण उर्स-ए-रज़वी में बरेली नहीं पहुंच सके, उन्होंने ऑनलाइन के माध्यम से उर्स-ए-रज़वी में शिरकत की और अपने घरों में नियाज और नजर का एहतेमाम किया। उर्स-ए-रज़वी की मुबारकबाद दी और अगले साल उर्स में आने की इच्छा जताई।
उर्स की व्यवस्थाओं में समरान खान, कौसर अली, यासीन खान, मोईन खां हाफिज इकराम रज़ा, डॉक्टर मेंहदी हसन, शमीम अहमद, अब्दुल्लाह रज़ा खां, दानिश रजा, बख्तियार खां, मौलाना निज़ामउद्दीन, मौलाना इंतज़ार अहमद, मोईन अख्तर, गुलाम हुसैन, रेहान रज़ा, आतिफ मिर्जा, रहबर खान, अली रजा, सैफ रज़ा कादरी, नावेद आलम, शाईबउद्दीन रज़वी, फैजान अहमद रज़ा, अमन खान, आदि लोग का बड़ा योगदान रहा।


