बदायूॅं जनमत। कस्बा सैदपुर के मोहल्ला काज़ी में अहले हदीस मस्जिद में ‘मिलादुन्नबी की हैसियत और अहले तौहीद की जिम्मेदारियां’ मौजू पर खिताब किया गया। इस दौरान मौलाना शमीम अहमद सल्फी ने कहा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश की खुशी तो चचा अबू लहब ने भी मनाई थी। लेकिन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बताए अल्लाह का कलमा और तौहीद को कबूल नहीं किया। इससे साफ़ पता चला है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत और तौहीद पर चलना असल ईमान होता है।
दूसरे मेहमान रहीम दाद खान ने बताया कि असल ईमान अल्लाह पर सच्चा ईमान और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत पर चलना है। हम अपनी जिंदगी को इस्लाम के लिए तबलीग में लगाए और हक पर कायम रहे।
प्रोग्राम में हाजी रजी उद्दीन, हाफिज साजिद, अफजल खान, मुस्तफा खान, तसव्वर खान, असलम वारसी, जुनैद खान, मो सरवर, मो इदरीस, तबरेज़ खान, नदीम खान आदि मौजूद रहे। प्रोग्राम के आखिर हाफ़िज़ साजिद हतरवी ने क़ौम और मुल्क के लिए दुआ ए ख़ास कराई।


