बदायूॅं जनमत। हर साल की तरह इस साल भी कस्बा सैदपुर, उसहैत और वजीरगंज में 12 रबी उल अव्वल के मौके पर जुलूस ए मोहम्मदी निकाला गया। जिसमें हजारों की तादाद में मुसलमानों ने शिरकत की।
कस्बा सैदपुर में सुबह 10 बजे ईदगाह के पेशे इमाम हजरत मुफ्ती सैय्यद वाकिफ अली साहब की अगुवाई में मोहल्ला खेड़ा सय्यदों वाले दालान से शुरू होकर परंपरागत रास्तों से होता हुआ दोपहर 12 बजे मोहल्ला झंडा पर जाकर ठहरा। जहां मोहल्ला झंडा कमेटी की जानिब से लंगर का बेहतरीन इंतजाम था। फिर दोपहर दो बजे से परंपरागत रास्तों से होता हुआ बदायूं चंदौसी मार्ग से मोहल्ला कुरेशियान पहुंचा जहां सलातो सलाम के साथ इस जुलूस के क़ाइद और ईदगाह के पेशे इमाम मुफ्ती सैय्यद वाकिफ अली साहब ने क़ौमो मिल्लत की दुआओं के साथ जुलूस का समापन हुआ।
जुलूस में हाफिज ताहिर हुसैन नूरी, हाजी मोहम्मद स्वालेह अली,जाहिद हुसैन नूरी साहब, हाफिज आतिफ अली, मौलाना शाने आलम, मौलाना राहील रज़ा, हाफिज अकरम नूरी, चेयरमैन इशरत अली खान, विकार अहमद खान, अनवर अली खान, हाजी वसी खान, सय्यद जहीरुल हसन, शाहिद अली इंजीनियर आदि मौजूद रहे।
उधर, कस्बा उसहैत में हर साल की तरह इस साल भी पैगम्बर मुहम्मद साहब की आमद के मौके पर जुलूस ए मोहम्मदी निकाला गया। सुबह आठ बजे जामा मस्जिद से शुरू होकर मोहल्ला पश्चिम, ऊपर बाजार होता हुआ पजावां, शाहपुर रोड, बंजारा रोड, म्याऊं रोड, कटरा चौराहा होता हुआ नगर पंचायत प्रांगण में सलातो सलाम के बाद जुलूस का समापन हुआ। जामा मस्जिद के पेश इमाम मुफ्ती असगर अली की सदारत में उलेमाओं ने तकरीर और नातों का नजराना पेश किया। जुलूस के बाद फात्हांख्वानी का दौर चला, लोगों ने अपने घरों में चिरागा किया। हजारों की संख्या में मौजूद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कसरत से दरूद शरीफ पढ़ा। इस दौरान मौलाना अकबर अली, हाफिज मुजफ्फर कादरी, नबाव हसन चेयरमैन, सैयद शाहिद अली, आसिम अहमद, उवैस अहमद, डॉ समर अहमद, सैयद शोएव अली, हाफिज शादाब कादरी, आलिम खान, हन्नान मियां, शानू अल्वी आदि मौजूद रहे।
उधर, कस्बा वज़ीरगंज में मदरसा इस्लामियां स्कूल में सुबह आठ बजे नगर के मुस्लिमों ने इकठ्ठे होकर एक दुसरे को ईद मिलादुन्नबी की मुबारक बाद पेश की। इसके बाद सभी लोग व मदरसे के बच्चों ने एक साथ मिलकर मस्जिदों व मदरसों से होते हुए जुलूसे मुहम्मदी निकाला। मो बनया में हिन्दू वर्ग के लोगों ने जुलूस का इस्तकबाल कर एकता सौहार्द की मिसाल दी।
ईद मिलादुन्नबी पर सुबह से मुस्लिमों में अपने सरकार की विलादत से बड़ा ही जोश था। मदरसों और मस्जिदों के इमाम व उलेमाओं ने लोगों को मुहम्मद साहब की ज़िन्दगी के बारे में बताया और नेक राह पर चलने की हिदायत की। इसके बाद सभी लोग हाथों में इस्लामी परचम लेकर नातख्वानी करते हुए कब्रिस्तान चांद मस्जिद, मस्जिद एक मीनारा, चांद तारा मस्जिद, दरगाह हजरत सूफी सिब्ते अहमद, मस्जिद रफीकुल औलिया, मदरसा फैजाने हुज़ूर, नई बस्ती जंगपुरा, मदरसा हाफिज शहजाद खा होकर इस्लामियां स्कूल वापस पहुंचे।
इस मौके पर हाफ़िज़ इशरत, हाफ़िज़ अबरार, हाफ़िज़ इरशाद, हाफिज मौलाना शमीम खां, हाफिज अबरार अहमद, अब्दुल गफ्फार, मुन्ने पहलवान, हबीब, एहसान खान, शराफत, दानिश आदि लोग मौजूद रहे।


