बदायूॅं जनमत। शनिवार को इमाम हजरत अली शेरे ख़ुदा की यौमे पैदाइश पर जिलेभर फात्हांख्वानी और लंगरदारी हुई। जगह जगह मौला ए कायनात की शान में महफ़िलें भी सजाईं गईं। वहीं बिसौली में जुलूस ए मौला ए कायनात निकाला गया। जिसमें अकीदतमंदों ने बढ़चढ कर हिस्सा लिया और या अली के नारे लगाए।
मोहल्ला शीशमहल गुड्डू खां के मकान से जुलूस की शुरुआत हुई। जुलूस में खाने ए काबा, मदीना, नज़फ एवं मौला अली की जुल्फिकार आदि झाकियां शामिल थी। जुलूस को संबोधित करते हुए जुबैर आलम ने कहा कि हजरत अली की शिक्षाएं इंसानियत, भाईचारे और शांति का संदेश देती हैं, जिन पर अमल कर समाज को बेहतर बनाया जा सकता है। जुलूस परंपरागत रास्तों से होता हुआ अपने गंतव्य तक पहुंचा, जहां फातिहा पढ़ी गई। अकीदतमंदों ने मुल्क की तरक्की, आपसी भाईचारे और अमन चैन के लिए दुआ मांगी। इस दौरान असरार एंड शब्बर पार्टी ने कब्बाली पेश कर जुलूस की रौनक बढ़ा दी। इस अवसर पर जुबैर आलम खां, मशहूद खां हमदम, अभीक्ष पाठक आहत, मेहर खान, एड पच्चू मियां, असलम सैफी, कासिम खान, सालिम खान, आसिम खान, शानू मदारी, सूफ़ी मुकीद, अद्दा आदि उपस्थित रहे।
इसके अलावा, हाजी बाबा खानकाह में अली डे के मौके पर एक महफ़िल का आयोजन किया गया। महफ़िल में शायरों और नोहाख्वानों ने हजरत अली की शान में मनकबत और कलाम पेश किए। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।
हाजी बाबा खानकाह के सज्जादानशीन मो. सलीम खां ने चिराग रोशन किया। वहीं महफ़िल की शुरुआत तिलावत ए कुरआन से हुई। निजामत अभीक्ष पाठक आहत ने की। मशहूर शायर मशहूद खां हमदम बिसौलवी ने अली की शान में कुछ यूं कहा मिदअत अली की, और जुवां इस गुलाम की। हर गाम जरूरत है, जहां एहतराम की।। उल्फत है मुस्तफा से, अली से गुरेज है। तौहीन हो रही है, खुदा के कलम की। अभीक्ष पाठक आहत ने कुछ इस अंदाज में पढ़ा तुम्हारे बिन अभी तक जी रहे हैं। हलाहल ज़िंदगी का पी रहे हैं। मशकूर नज़मी ने अली डे को इस अंदाज में कहा इब्तिदा जनवरी की यूं अच्छी लगी, ये रजब पड़ गई है नये साल में। मदहे मौला इबादत है मौलाई की, जश्ने मौला अली है नये साल में।। डा. अमीरउद्दीन अमीर ने यूं कहा जी हुज़ूरी से मिलती हैं अब पगड़ियां।
हक़ बयानी को मुँह खोलता कौन है।। आखिर में महफ़िल के आयोजक राजा फिरोज ने सभी आए हुए मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। महफ़िल में माजिद सलमानी, सूफी जरीफ अश्क, फहीम बिसौलवी, आलम बेग, हमजा बिसौलवी, फरीद इदरीसी, श्रीदत्त मुजतर ने भी अपने अपने कलाम पेश किए। इस अवसर पर मन्नू, अहकम खान, रम्मू खान, मूसा, दानिश, ओसाफ़ खान आदि मौजूद रहे।


