जनमत एक्सप्रेस। समाजवादी पार्टी के नेता, मुख्य सचेतक व सांसद धर्मेंद्र यादव ने संसद में नक्सलवाद, कुपोषण, नाटापन आदि अहम मुद्दों को उठाया।
संसद में उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर नक्सलवाद इस देश की बहुत ही गंभीर समस्या है और इस गंभीर समस्या में हमारे जवानों ने अपनी कुर्बानियां दीं हैं। केंद्र सरकार इस बात का दावा करती है कि देश से नक्सलवाद बिल्कुल समाप्त हो चुका है, हमारी पार्टी यह मानती है नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है बल्कि इसमें कुछ कमी अवश्य आई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के तीन जिले चंदौली, मिर्जापुर और सोनभद्र, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों की सीमा मिलने के कारण नक्सलवाद से प्रभावित हो गए थे। नवंबर 2004 में पीएसी के एक ट्रक को नक्सलियों ने बारूदी सुरंग से उड़ा दिया था जिसमें हमारे कई जवान शहीद हुए, उस समय श्रद्धेय नेता जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे अगर वो चाहते तो नक्सलियों पर एक बहुत बड़ा जवाबी हमला कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, घटना के तीन दिन बात सभी गुप्तचर एजेंसियों के मना करने बावजूद एक मुख्यमंत्री की हैसियत से श्रद्धेय नेता जी घटनास्थल पर गए और नक्सलवादियों से बातचीत की, उस बातचीत का परिणाम यह हुआ कि बासमती कोल के नेतृत्व में हजारों नक्सलियों ने श्रद्धेय नेता जी समक्ष सशस्त्र आत्मसमर्पण किया।जब श्रद्धेय मुलायम सिंह यादव ने वहां पर नक्सलवाद का कारण जाना तो गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, असमानता, प्रशासनिक अत्याचार इसके मुख्य कारण पाए और उनके प्रयास से उत्तर प्रदेश उसी दिन नक्सलवाद से मुक्त हो गया। हमें आवश्यकता है नक्सलवाद के कारणों को जानने की, सैकड़ों सालों से वहां के शोषित, पीड़ित और असमानता के शिकार हैं। 2003 में इनके सुधार और संपदा को बचाने के लिए वन्य कानून बनाया जिसमें उन्हें बहुत सारे अधिकार मिले लेकिन वर्तमान सरकार ने उसे निरस्त कर दिया। इन नियमों के माध्यम से आदिवासियों को जो अधिकार मिले थे, बड़े बड़े पूंजिपतियों के लिए फायदा पहुंचाने के लिए नियमों का शिथिलीकरण कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि आदिवासियों के अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है, तेंदू के पत्ते की लूट हो रही है, बाहर के लोग वहां के खनिज को लूट कर ले जाते हैं।
हमारे आदिवासी भाई नाटापन, ड्रॉपआउट, बड़ी हुई शिशु मृत्यु दर, खाद सुरक्षा, भूमि विवाद, कुपोषण जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। जनकल्याणकारी योजनाओं का सही रूप से क्रियान्वयन के अभाव में आदिवासियों के लिए आवंटित धन का सही उपयोग नहीं हो पाता है। आगे कहा कि नक्सलवाद का इलाज सिर्फ ताकत से नहीं किया जा सकता है, आदिवासियों के लिए स्कूल, सड़के, अस्पताल, बिजली, पीने योग्य पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
हमारे पैरामिलिट्री फोर्सेस का सम्मान देश का हर नागरिक करता है, उन्होंने देश वासियों के लिए समय आने पर अपना बलिदान दिया है उनके इस बलिदान को शहीद का दर्जा दिया जाता था जो कि वर्तमान भाजपा सरकार ने छीन लिया है। विगत दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने उनका यह दर्जा देने का फैसला सुनाया परंतु केंद्र सरकार न्यायालय में रिवीजन के लिए चली गई। आखिर क्या कारण है कि भाजपा सरकार हमारे पैरामिलिट्री फोर्सेस के जवानों को शहीद का दर्जा नहीं देना चाहती?
उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़, उड़िसा, महाराष्ट्र तथा झारखंड चार ऐसे बड़े राज्य हैं जो नक्सलवाद से प्रभावित हैं, वहां के लोग अलग अलग समस्याओं तथा चुनौतियों से जूझ रहे हैं। नाटापन, कुपोषण, खराब टीकाकरण, बार बार होने वाली हिंसा जैसी समस्याओं का निवारण अत्यंत आवश्यक है। आगे कहा कि यह सारी समस्या केंद्र सरकार के नीति आयोग 2023 की रिपोर्ट, कैग ऑडिट रिपोर्ट 2023, पीएमजीएसवाई प्रगति रिपोर्ट जैसे सरकारी दस्तावेजों के आधार पर कही जा रही है।

अंत में मैं अपनी पार्टी और अपने नेता आदरणीय अखिलेश यादव की तरफ से कहना चाहता हूं कि कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के आर्थिक हितों की खातिर करोड़ों आदिवासियों को उजाड़ने का प्रयास मत करो। उनको अपना हक, अधिकार, न्याय, सम्मान, मौलिक सुविधाएं मिलनी चाहिए।

