उर्दू अदब की यादगार शाम; चराग़ों को बुझाया जा रहा है, हक़ीक़त को छुपाया जा रहा है…

उत्तर प्रदेश

बदायूॅं जनमत‌। बीती रात कस्बा सैदपुर के मोहल्ला पूरब निवासी अतहर ख़ान के आवास पर एक यादगार अदबी महफिल का इंनक़ाद किया गया। यह महफ़िल ख़ान साहिब की निगरानी और सरपरस्ती में सजाई गई, जहाँ इल्म-ओ-अदब, शेर-ओ-शायरी और संगीत का शौक़ रखने वाले हज़रात ने शिरकत की। महफिल की रौनक़ और वकार में उस वक्त और बेपनाह इज़ाफ़ा हुआ, जब सैदपुर के कई मशहूर व मारूफ़ शायरों और क़व्वालों की तशरीफ़-आवरी हुई।
महफ़िल का आग़ाज़ रिवायती और तहज़ीबी अंदाज़ में हुआ। बारी-बारी तमाम शायरों को दावत-ए-क़लाम दी गई। महफिल का माहौल बेहद घरेलू, पुरसुकून और अदबी था, जहां शायरों ने माइक पर अपने बेहतरीन कलाम, ग़ज़लों और नज़्मों से सामईन के दिलों को जीत लिया। जहां एक तरफ़ शायरों के बेहतरीन अशआर पर दाद-ओ-तहसीन के फूल बरसाए गए, वहीं दूसरी तरफ़
मशहूर क़व्वाल नईम साबरी की मुतरन्नम ग़ज़लों ने महफ़िल में एक अलग ही समां बांध दिया। हाशिर साहिब की संजीदा ग़ज़लों ने खूब दाद-ओ-तहसीन लूटी और जनाब डॉ. इमरान की जिंदादिल शायरी ने लोगों में ज़िंदादिली पैदा कर दी।साहिबे आलम साहिब की मज़ाहिया शायरी से भी लोग खूब लुत्फ़अंदोज़ हुए। परवेज खान ने अपनी सुरीली ग़ज़लों से लोगों को खूब महज़ूज़ किया।
मशहूर शायर आतिफ़ सैदपुरी के ऊपर लिखे हुए अशआर पर लोगों ने दिल खोलकर दाद दी और देर तक गुनगुनाते रहे।
महफ़िल में हाशिर सैदपुरी, डॉ. इमरान सैदपुरी, आतिफ़ सैदपुरी, साहिबे आलम सैदपुरी, परवेज़ ख़ान, असलम ख़ान साहिब, आलम खान, ज़हीरुल हसन, हाजी गड्डू, सन्नी ख़ान तथा छोटे साहब ने अपने कलाम पेश किए।
आख़िर में जनाब अतहर ख़ान साहिब ने सभी मेहमानों का तहेदिल से शुक्रिया अदा किय। इस संकल्प का इज़हार किया कि उर्दू अदव की आबीयारी और अपने बुजुर्गों की विरासत को जिंदा रखने के लिए ऐसी शानदार अदबी महफिलों का आयोन आगे भी होता रहेगा।

आतिफ सैदपुरी के इस कलाम ने वाहवाही लूटी…

चराग़ों को बुझाया जा रहा है।
हक़ीक़त को छुपाया जा रहा है।
कई लाशों से आवाज़ आ रही है,
हमें ज़िंदा जलाया जा रहा है।

कलाम पेश करते हुए शायर हजरात : जनमत एक्सप्रेस।

रिपोर्ट: ज़ीशान सिद्दीकी

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