बदायूं में फर्जी स्कूल पकड़ा; फीस के दो लाख वसूलकर संचालक फरार, सौ बच्चों का था दाखिला

शिक्षा

बदायूॅं जनमत‌। अंबियापुर ब्लाक क्षेत्र के गांव रिसौली की नगू पट्टी में जून में कानपुर से आए एक व्यक्ति ने पीजी (प्ले ग्रुप) से कक्षा आठ तक का स्कूल खोला। ग्रामीणों ने कान्वेंट स्कूल खुलने पर बड़े उत्साह से बच्चों का एडमीशन कराया। 100 से अधिक बच्चों का एडमीशन हो गया। स्कूली वाहन, तीन टीचर और एक चपरासी भी रखा गया। अभिभावकों से छह माह तो किसी से पूरे सत्र की फीस जमा कराई। स्टेशनरी और ड्रेस के नाम पर वसूली की। इसके बाद संचालक फरार हो गया। बुधवार को अभिभावकों ने स्कूल पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस चौकी पर तहरीर दी है, फोन नंबर भी सविलांस पर लगाने को दे दिया है। दो लाख रुपये से अधिक राशि ले जाने का आरोप है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव रिसौली में आरोपी इसी शैक्षणिक सत्र के शुरू जून में आया था। ग्रामीणों को भरोसे में लेकर स्कूल खोला। स्कूल के बोर्ड पर सीबीएसआई संचालित लिखा गया। गांव के मास्टर ओमप्रकाश ने बताया कि उसे नगू पट्टी में अपना भवन किराए पर दे दिया था। उसने गांव के लोगों से संपर्क कर फटाफट एडमीशन कराए। ग्रामीणों ने उस पर विश्वास किया। क्योंकि उसने भवन पर रंगाई-पुताई कराकर आरके पब्लिक स्कूल सीबीएसई बोर्ड संचालित लिखवा दिया और स्टाफ भी रख लिया।
गांव के अलावा आसपास के गांव अकौली, गढ़ी आदि गांवों के बच्चों के एडमीशन होने लगे। 15 अगस्त तक सौ से अधिक बच्चों के दाखिले कर लिए। स्कूल में 15 अगस्त को राष्ट्रीय कार्यक्रम भी नहीं कराया और उसी दिन से फरार हो गया। ग्रामीणों के अनुसार वह फीस में दो लाख से अधिक रुपये लेकर फरार हुआ है। मोबाइल फोन नंबर भी बंद आ रहा है। उसके फरार होने की सूचना से ग्रामीण अभिभावकों में खलबली मची है। पुलिस को सामूहिक तहरीर देने वालों में इकरार अंसारी, इकबाल अंसारी, श्याम सिंह, रिंकू सिंह, देवेन्द्र कुमार, गोपाल शर्मा, प्रदीप कश्यप, प्रेम सिंह शाक्य, प्रेमपाल शाक्य, सुरेश सिंह, गौरव सिंह, शीश पाल, कमलदीप आदि के हस्ताक्षर हैं।

ग्रामीणों ने खोली संचालक की पोल…

14 अगस्त को गुधनी गांव से कुछ लोग नगू पट्टी में अपनी रिश्तेदारी में आए थे। उन्होंने स्कूल संचालक के बारे में ग्रामीणों को बताया कि इस संचालक ने तो उनके गांव के अलावा बधौली और हैवतपुर में भी स्कूल खोले थे और रकम लेकर फरार हो गया था। अब ऐसा फरार हुआ है कि ढूंढ़े नहीं मिल रहा। वहीं ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि स्कूल संचालक इतना चालाक था कि उसने ग्रामीणों को अपना असली नाम नहीं बताया। कभी रमेश कभी सुरेश बताता।
सीओ बिल्सी आलोक सिद्धू ने बताया कि फर्जी स्कूल खोलकर फीस में रुपये वसूलकर फरार होने के मामले में पहले डीआईओएस या बीएसए जांच करेंगे, उनकी जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपी के विरुद्ध केस दर्ज कर लिया जाएगा।

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