बदायूँ जनमत। खलीफा ए अव्वल अमीरुल मोमिनीन हजरत सिद्दीक अकबर रदी अल्लाहु अन्ह की यौमे शहादत पर कस्बा सैदपुर में घर व मस्जिदों में महफ़िल सजाकर खिराजे अकीदत पेश की गई। इधर सैदपुर के मोहल्ला कुरेशियान नूरी चौक पर एक महफिल बनाम जिक्रे सिद्दीक ए अकबर का आयोजन किया गया। जिसकी शुरुआत तिलावते कलामे इलाही से हाफिज रज़ा उल हक़ ने की, इसके बाद नात व मनकावत के साथ तकरीर पेश की गई। मौलाना राहिल खां ने तकरीर पेश करते हुए कहा की खलीफा ए अव्वल यार ए गार ए रसूल हजरत सिद्दीक अकबर का नाम अब्दुल्ला अबू बकर और कुन्नियत सिद्दीक व अतीक है शिजरा ए नसब सातवीं पुश्त में जाकर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से जा मिलता है। वाक्या ए फील के ढाई साल बाद आप पैदा हुए। हजरत सिद्दीक अकबर रदी अल्लाहु अन्ह ने अपनी सारी माल दौलत अल्लाह की राह में खर्च कर दी और जो मोहब्बतों का निचौड़ तीन मोहब्बत होती हैं आल की मोहब्बत, माल की मोहब्बत, और जान की मोहब्बत, यह तीनों मोहब्बतें सरकारे मदीना सल्लल्लाहो ताला वसल्लम की मोहब्बत पर कुर्बान कर दीं। आप आशिकों के इमाम बन गए। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद बिल इत्तेफाक खलीफा ए इस्लाम और अमीरुल मोमिनीन मुकर्रर हुए, 2 बरस 3 माह 11 दिन खिलाफत की बागडोर संभाली। कब्ल ए इस्लाम भी बुरे कामों से दूर रहते और लोगों के मामलात सुलझाते, लोगों की अमानत रखते और अमानत के फैसले करते। 13 हिजरी में आपकी शहादत हुई। इसके अलावा हाफिज रिजवान, हाफिज नौशाद रज़ा ने हजरत सिद्दीक अकबर रदी अल्लाहु अन्ह के जीवन पर प्रकाश डाला। आखिर में सलातो सलाम के बाद कौम व मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ कर शिरीनी तस्कीम की गई। इस मौके पर सालिम कुरैशी, रेहान कुरैशी, राशिद रज़ा, जुनेद सकलेनी, नाहिद हुसैन आदि मौजूद रहे।


