इस्लाह-ए-मुआशरा; बाप की विरासत में लड़की का हक़, जमीयत अहले हदीस के सालाना जलसे का आयोजन

धार्मिक

बदायूॅं जनमत‌। कस्बा सैदपुर के मोहल्ला पूरब में जमीयत अहले हदीस की युवा इकाई अंजुमन-ए-इस्लाह-ए-मुस्लिमीन सैदपुर की निगरानी में इस्लाह-ए-मुआशरा (समाज सुधार) के विषय पर इस साल भी जलसे का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उलमा-ए-किराम को अलग-अलग विषय दिए गए।
जलसे की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन पाक से हुई, जिसकी सआदत मोहिद ख़ान को हासिल हुई। इसके बाद हाफिज सज्जाद अहमद उस्मानी ने मेहमानों का इस्तकबाल करते हुए ख़ुतबा-ए-इस्तक़बालीया पेश किया और अपने विषय “सोशल मीडिया: क्या सही और क्या ग़लत” पर तफसील से रोशनी डाली। इसके बाद फ़ज़ीलत-उश-शेख मोहम्मद शमीम सैलफ़ी हफ़िज़हुल्लाह बदायूंनी ने “क़ुरआन से उम्मत की ग़फ़लत-अस्बाब व इलाज” पर बहुत ही दिलकश और असरदार बयान पेश किया।
इस जलसे का खास मौज़ू था “बाप की विरासत से बेटी महरूम क्यों?” इस अहम और नाज़ुक विषय पर फ़ज़ीलत-उश-शेख सरफ़राज़ अहमद ख़ान फैज़ी हफ़िज़हुल्लाह (मुंबई) ने क़ुरआनी और शरीअती दलाइल के साथ बेहतरीन और दिल को छू लेने वाला बयान दिया। जलसे की सदारत फ़ज़ीलत-उश-शेख रज़ा उल्लाह अब्दुल करीम मदनी हफ़िज़हुल्लाह ने की, जिन्होंने “अहले बैत के फ़ज़ाइल और हक़ूक़” पर बयान फरमाया।
जलसे की निज़ामत हाफिज सज्जाद अहमद उस्मानी, इमाम मस्जिद अहले हदीस सैदपुर ने अंजाम दी। कार्यक्रम में हतरा, बिसौली, बदायूं, सहसवान, बरेली और आसपास के कई इलाक़ों से उलमा और मेहमान-ए-गिरामी तशरीफ़ लाए। लेक्चरर मोहम्मद सरवर साहब ने क़लिमा-ए-तशक्कुर पेश किया और सभी उलमा व मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। आख़िर में मुल्क व क़ौम की तरक़्क़ी और भलाई के लिए ख़ास दुआ की गई।रिपोर्ट: ज़ीशान सिद्दीकी, सैदपुर

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