बदायूॅं जनमत। शहर के स्काउट भवन में कम्युनिस्ट नेता कामरेड मैडम निगार नफ़ीस एड. की तीसरी पुण्यतिथि के मौक़े पर कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता राग़िब ककरालवी व संचालन अहमद अमजदी बदायूंनी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में समाजवादी पार्टी के ज़िला अध्यक्ष आशीष यादव और वरिष्ठ सपा नेता फ़ख़रे अहमद शोबी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजीत यादव मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना राजवीर सिंह तरंग व नाते पाक अहमद अमजदी बदायूंनी ने पेश की।
अध्यक्षता कर रहे राग़िब ककरालवी ने कहा-
ज़रुरत लौ चिराग़ों की बढ़ा कुछ
मगर ज़ालिम ज़माने की हवा कुछ
संचालन कर रहे अहमद अमजदी बदायूंनी ने कहा-
हम से और पीठ दिखाने से भला क्या मतलब
हमने मैदान में तलवार से बातें की हैं
राजवीर सिंह तरंग ने कहा-
ऐसा था हमसफ़र जो सफ़र में नहीं रहा
इतना क़रीब था कि नज़र में नहीं रहा
करता रहा जो बज़्म को रौशन तमाम रात
ढ़लते ही रात क्यों वो नज़र में नहीं रहा
अजमत ककरालवी ने कहा-
बस जाते हैं सीने में हमेशा को हमारे
कुछ लोग कभी दिल से निकाले नहीं जाते
विष्णु असावा बिल्सी ने कहा-
आंधियों के सामने दीपक जलाना चाहिए
गम की दीवारें खड़ीं हों मुस्कुराना चाहिए
शम्स मुजाहिदी ने कहा-
और कुछ करना पड़ेगा “शम्स” जी
अब तो बिटिया भी सयानी हो गई।
बिल्सी से पधारे ओजस्वी जौहरी सरल ने कहा-
भावनाओं के समंदर में भला कब तक बहूं
पार जाना चाहता हूँ आपके बिन क्या करुँ
कवित्री दीप्ति सक्सेना दीप ने कहा-
थे हौसलों में पंख भी, था आसमां आजाद भी
छोटी चिड़ी को जाल में, कैसे फंसाया क्या पता
अच्छन बाबू अहबाब ने कहा-
बीते हुए पलों में खोकर तो देखिए
आती नहीं है नींद सोकर तो देखिए
सैय्यद अमान फर्रुखाबादी ने कहा-
याद मिटती नहीं मिटानें से
फायदा क्या है दिल जलाने से
हसरत गौरामई ने कहा-
है बे वफ़ा ज़माना देखा है प्यार कर के
खाया है मैंने धोका तेरा एतबार कर के
इनके अलावा गौहर अली एडवोकेट, मुजाहिद नफीस, मुअम्मर नफ़ीस, शैहला निगार, ग़ज़ाला निगार, मरयम निगार, सलमान उर्फ चांद मियां, कमलेश श्रीवास्तव, गुड्डो सक्सेना, कुसुम सक्सेना, डॉ शतीश, श्रीमान गुप्ता जी, आमिर सुल्तानी, अहमद नबी, नवनीत यादव, आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।

